बड़ा मांगलिक अर्थात् विशिष्ट मंगलपाठ महामंगलकारी है. यह भावपूर्ण और साधना से निष्पन्न है. सबके लिए यह आशीर्वाद स्वरूप है. यह द्रव्यमंगल, भावमंगल का कारक है. • श्रद्धा पूर्वक की जाती अरिहंत प्रभु की प्रार्थना, पंच परमेष्ठी की वंदना और जिनशासन के रक्षक देवी-देवताओं की कामना भक्तों को अपार विश्वास से ओतप्रोत करती है. इससे उनका जीवन-पथ सरल-सुगम बनता है. प्रार्थना, वंदना और कामना में अद्भुत शक्ति निहित होती है. • बीजमंत्रों से युक्त प्राचीन श्लोक हमारे भीतर रहे चक्रों को गतिशील करते हैं, हमारे आभामंडल को शुद्ध व शक्तिशाली बनाते हैं. ये जीवन के लिए सुख-शांतिदायक और संकटमोचक होते हैं. • मंगल की कामना सर्वमंगल का आधार बनती है. • प्रस्तुत है सरस्वती साधक, जिनशासन के सजग प्रहरी, क्रांतिकारी-ओजस्वी प्रवचनकार, आचार्य श्री विमलसागरसूरीश्वरजी महाराज साहब का बड़ा मांगलिक यानी विशिष्ट मंगलपाठ. इसने हजारों लोगों को श्रद्धाभावना, आत्मविश्वास, सही दिशा, अपार सामर्थ्य, निर्णय क्षमता और सम्यक् शक्तियों का सत्व दिया है. • हमारा विश्वास है कि यह आपको भी कदम-कदम पर शकुन देगा. – मुनि श्री पद्मविमलसागरजी महाराज